4दीवारों पर कुरान

एक बार दोनों समकालीन महान संत सूफी परंपरा के एक बड़े संत कुबरा वली तराश के पास पहुंचे थे। संत कुबरा वली तराश ने कमाल उद्दीन याहिया मनेरी को अपनी तसवी (माला) दी थी जबकि ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को उन्होंने अपनी जाये नमाज (नमाज पढ़ने के लिए बिछाई जाने वाली चादर) दी थी। यहाँ की दूसरी प्रसिद्ध दरगाह सैय्यद दौलत मनेरी की है। मुगल बादशाह जहांगीर के समकालीन सैय्यद दौलत मनेरी इस परंपरा की नवीं पीढ़ी के महान संत थे।उनका मकबरा मुगल स्थापत्य का उत्कृष्ट नमूना है। इस मक़बरे की दीवारों पर कुरान की आयतें लिखी हुई हैं।सैय्यद दौलत मनेरी के मक़बरे का निर्माण बिहार-बंगाल सहित पांच सूबे के गवर्नर इब्राहिम खां कांकड़ ने कराया था। उत्तर प्रदेश के चुनारगढ़ से मंगवाये गये पत्थर से निर्मित इस मकबरे के चारों ओर लगायी गयी फुलवारी सुंदरता को चार चांद लगाती है। मकबरे के सामने विशाल और सुंदर तालाब है।

 

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मनेर अपने विशिष्ट प्रकार से तैयार लड्डुओं के लिए भी जाना जाता है। स्थानीय विक्रेताओं का दावा है कि लड्डू बनाने के लिए सोन नदी के चीनी जैसे पानी का इस्तेमाल किया जाता है।

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