1ऐसा क्यों ?

8 साल के आरव को जब नींद नहीं आती वह कहानियां सुनने की जिद् करने लगता है।सुदीप्ता का मूड तो ठीक नहीं था पर आरव की ज़िद के आगे उसे झुकना पड़ा। उसने कहा चलो आज तुम्हें राजा रानी की कहानी सुनाती हूं। आरव खुश होकर बगल में लेट गया। बगल के बिस्तर पर उसकी बेटी अनुभूति भी सोने की तैयारी कर रही थी।

सुदीप्ता  ने कहानी शुरू की “ एक राजा था और एक रानी थी। बहुत दिनों तक दोनों को कोई संतान नहीं हुई। फिर उन्हें एक लड़की हुई उस लड़की को उन्होंने बड़े प्यार से पाला। राजा की तो वह जान थी। तुम्हे मैंने उस राजा की कहानी तो सुनाई है न जिसकी जान उसके तोते में थी बिल्कुल उसी तरह वह राजा की भी जान उसकी राजकुमारी में थी।

उसने उसे बेटे की तरह पाला हर तरह की शिक्षा दीक्षा दी। जो भी एक लड़का कर सकता था उसे करने की छूट दी। राजकुमारी भी एक बेटे की तरह राजा रानी की देखभाल करती। राजा रानी ये भूल गए कि वह एक बेटी है पर समाज ने उन्हें भूलने नहीं दिया। समाज ने ताना मारना शुरु कर दिया। “

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आरव ने बीच में टोकते हुए कहा” राजा रानी को भी कोई ताना मार सकता है क्या मम्मा।”

“ हां बेटा, समाज के लोग राजा रानी को भी ताना मार सकते हैं। मजबूर होकर राजा रानी को अपनी राजकुमारी की शादी करनी पड़ी और उसे विदा करना पड़ा।  वह राजकुमारी बहुत रोई। उसे लगता था वह हमेशा अपने माता पिता के साथ रहेगी। उसे पता था उसे जाने के बाद उसके माता पिता को देखने वाला कोई नहीं।  इसलिए वह बहुत रोई इतने प्यार से दुलार से सींचे हुए पौधे को उखाड़कर अनजान परायी  जगह लगाना बड़ा मुश्किल होता है यह कोई नहीं सोचता। “

कहते-कहते सुदीप्त की आंखों से दो बूंद आंसू गिर पड़े। उसने नहीं देखा कि आरव अब सो चुका है पर बगल में लेटी उसकी 14 साल की बेटी अनुभूति अच्छी तरह समझ रही थी की यह कहानी सुदीप्त की खुद की है।

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